LIVE: एक जगह पर यहां देखें पल-पल की ताज़ा अपडेट्स, BJP की लहर। 

आ गया यूपी चुनाव का परिणाम, ये बने विजेता

जौनपुर. यूपी चुनाव 2017 का परिणाम चुका है। यूपी की 403 विधानसभासीटों पर 4854 उम्मीदवारोंकी किस्मत का फैसला होना था। जिसमे बीजेपी ने 324 सीटों पर कब्जा किया है। जिसमें जौनपुर के 9 सीटों पर बीजेपी के 6 प्रत्याशियों ने अपना कब्जा जमाया है।

 

 

जौनपुर में यह है जीत का समीकरण

 

 

 

 

 

मुंगराबादशाहपुर से बसपा की सुषमा पटेल जीतीं।

 

मछलीशहर से सपा के जगदीश सोनकर।

 

मड़ियाहूं से अपना दल की लीना तिवारी।

 

जफराबाद से भाजपा के हरेंद्र सिंह।

 

केराकत से भाजपा के दिनेश चौधरी।

 

बदलापुर से भाजपा के रमेश मिश्रा।

 

शाहगंज से सपा के शैलेंद्र यादव जीते।

 

सदर से भाजपा के गिरीश यादव जीते।

 

मल्हनी से सपा प्रत्याशी पारसनाथ यादव जीते।

जनपद की दोनों सीट पर जीती भाजपा, बसपा को मिला तीसरा स्थान

हमीरपुर। भरुआ सुमेरपुर नोटबंदी व विकास के मुद्दे ने बुन्देलखण्ड में आखिरकार कमल खिला ही दिया। 19 सीटों में कमल खिल जाने से भाजपाइयों के चेहरे खिल गये हैं। हमीरपुर की दोनों विधानसभा सीट पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी हुये हैं। जिसमें राठ सुरक्षित सीट से भाजपा की मनीषा अनुरागी ने कांग्रेस प्रत्याशी गयादीन अनुरागी को रिकार्ड एक लाख 4643 मतों से जीत प्राप्त की। वहीं हमीरपुर सदर से भाजपा के अशोक सिंह चन्देल ने सपा के डा. मनोज प्रजापति को 48665 मतों से पराजित किया।

 

विजयी प्रमाणपत्र लेने के बाद निर्वाचित विधायकों ने इस जीत को मोदी के विकास की जीत बताते हुये समाजवादी सरकार की खराब कानून व्यवस्था पर जनता का आक्रोश बताकर भाजपा नेतृत्व द्वारा गुंडाराज का खात्मा जल्द किये जाने के संकेत दिये।

 

शनिवार को सुबह 8 बजे सुमेरपुर के मंडी स्थल मे मतगणना शुरु होते ही जैसे जैसे चक्रवार परिणाम आने शुरु हुये। वैसे ही भाजपाइयों के चेहरे पर चमक बढ़ने लगी। हमीरपुर विधानसभा मे तीस चरणों की मतों की गिनती में 28 चरणों में भाजपा प्रथम नम्बर पर रही, जबकि सपा मात्र दो चरणों मे ही नम्बर एक बन पाई। इस विधानसभा में डाले गये कुल 252643 मतों मे भाजपा को 110888 तथा सपा को 62233, बसपा को 60543 मत प्राप्त हुये जबकि राठ विधानसभा में 30 चरणों की गिनती में 29 चरणों मे भाजपा ने जीत हासिल की। इसमें कुल 242011 मतों में भाजपा को 147526 तथा कांग्रेस को 42883, बसपा को 38710 मत मिले। हमीरपुर मे 864 व राठ मे 895 डाक मत पत्र तथा नोटा का प्रयोग हमीरपुर मे 3355 तथा राठ में 4595 लोगों ने किया। इस चुनाव में हमीरपुर से 11 व राठ से 7 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

 

 

हमीरपुर विधानसभा

 

भाजपा-110888

 

सपा-62233

 

बसपा-60543

 

पीस पार्टी-8513

 

ओमप्रकाश-912

 

जमाल-748

 

धर्मेन्द्र-1931

 

महेश्वरी-841

 

राममिलन-629

 

रमाशंकर-1022

 

लल्लू-990

 

नोटा-3355

 

 

राठ विधानसभा

 

भाजपा-147526

 

कांग्रेस-42883

 

बसपा-38710

 

अजीत-3083

 

देवीसिंह-1206

 

रमेश-1674

 

गंगोत्री-2334

 

नोटा-4595

UP Elections : BJP के एक बड़े संदेश ने बनाई गहरी पैठ और उखड़ गई अखिलेश यादव की कुर्सी!

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों (UP Assembly Elections) में प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया. यूपी जैसे बड़े प्रदेश में बीजेपी की जीत के बड़े मायने हैं और इसका असर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा. विरोधी पार्टियों को समझ में ही नहीं आ रहा कि आखिर कमी कहां रह गई. खासतौर से समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस तो गठबंधन के बाद से जैसे जीत के प्रति आश्वस्त थे, लेकिन यह भी उनके काम नहीं आया और उनको अब तक की करारी हार झेलनी पड़ी. वैसे तो बीजेपी की जीत में कई अहम कारक हैं और विरोधियों के बीच अनिश्चितता के माहौल ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई, लेकिन उसका जनता के बीच पहुंचाया गया एक संदेश ऐसा कारक साबित हुआ कि यूपी की जनता ने कांग्रेस, सपा और बीएसपी से दूरी बना ली और उन्होंने बीजेपी के पास जाने में ही भलाई समझी…

विरोधी दलों में जारी उठापटक के बीच बीजेपी (BJP) एक ऐसे संदेश को जनता के बीच स्थापित करने में सफल रही, जिसने गेमचेंजर की भूमिका निभाई. यह संदेश था कि सत्ताधारी समाजवादी पार्टी को केवल दो की ही चिंता है- यादव और मुसलमान! इतना ही नहीं उसने इसके लपेटे में कांग्रेस और बसपा को भी ले लिया.

गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश में बेरोजगारी की बड़ी समस्या है और अखिलेश यादव के शासनकाल में नौकरियों में यादवों का बोलबाला देखा गया. ज्यादातर विभागों में इसी जाति के लोगों को नियुक्ति दी गई और अन्य वर्ग इससे वंचित रह गए. भले ही वह पिछड़े थे. UPPSC की परीक्षा में यादव जाति के प्रतिभागियों को मिली बड़ी सफलता ने इस तथ्य को और स्थापित कर दिया. बाद में इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई और UPPSC चेयरमैन डॉ. अनिल यादव के कामकाज के तौर तरीकों पर भी आरोप लगे. बाद में कोर्ट ने बोर्ड के चेयरमैन को ही हटा दिया. इससे जनता के बीच यह संदेश गया कि सपा के सत्ता में आने से अन्य वर्गों का कल्याण नहीं होगा और बीजेपी ने इसे ही भुना लिया.

सपा सरकार पर मुसलमानों पर भी अधिक ध्यान देने का आरोप लगा, जिससे एक हद तक हिंदू भी एकजुट होकर बीजेपी की ओर चले गए. कांग्रेस से गठबंधन होने के बाद भी उन्हें इसका फायदा नहीं मिला, क्योंकि कांग्रेस पर तो पहले से ही मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप थे. विकास के नाम पर ‘काम बोलता है’ का नारा भी फेल रहा, क्योंकि कई लोगों का मानना है कि लखनऊ को छोड़कर कहीं भी विकास कार्य ज्यादा नहीं हुए. खुद उनके विज्ञापन भी लखनऊ केंद्रित रहे.

दूसरी ओर बसपा सरकार के दौरान मायावती पर जाटवों को ही वरीयता देने का आरोप लग चुका था. मतलब जनता के बीच यह संदेश गया कि मायावती वापस सत्ता में आने पर फिर वही करेंगी. फिर क्या था बीजेपी के चुनाव प्रबंधकों और प्रचारकों ने जनता के बीच इस तथ्य को स्थापित कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी ही एक ऐसा दल है जो सबके बारे में सोच रहा है और उसी को वोट देने से सबका कल्याण होगा. इससे अखिलेश यादव और राहुल गांधी को जनता के बीच युवाओं के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करने का कांग्रेस और सपा का प्रयास पूरी तरह फेल हो गया… BJP ने उत्तरप्रदेश की जनता के बीच पैठ बनाने के लिए न केवल अपने संगठन को मजबूत बनाया, बल्कि उसने बिहार वाली गलती नहीं दोहराई और चुनाव को विकास जैसे मुद्दे से नहीं भटकने दिया. कुछ विवाद भी हुए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित उसके स्टार प्रचारकों ने इनके साथ ही जनता का ध्यान विकास की ओर केंद्रित रखा और ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली…

धीरे-धीरे साफ हो रही मतदान की तस्वीर, किसकी चमकेगी तकदीर

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड , पंजाब, गोवा और मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो गए हैं। सबसे पहले यूपी की बात करें तो यूपी में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए पूरा बहुमत मिल गया है। बीजेपी  इनमें 317 सीटें जीत चुकी है। और 6 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस और सपा का गठबंधन 55 सीटें जीत चुका है। वहीं बीएसपी ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की है और 1 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं अन्य को यूपी में पांच सीटें मिली हैं। यूपी में बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिल गया है। उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड में बीजेपी 56 सीटें जीत चुकी है और एक सीट पर आगे चल रही है। वहीं कांग्रेस को 11 सीटें मिली हैं और अन्य ने दो सीटों पर जीत दर्ज की है। पंजाब की बात करें तो पंजाब में 69 सीटों पर जीत दर्ज की है और 9 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं अकाली दल ने 14 सीटें जीती हैं तो बीजेपी ने 3 और अन्य ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं गोवा में कांग्रेस ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की है और 1 सीट पर आगे चल रही है। वहीं बीजेपी 13 सीटें जीत चुकी है और 1 सीट पर आगे चल रही है। अन्य ने 4 सीटें जीती हैं और एमजीपी  ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। मणिपुर में कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की है और 5 पर आगे चल रही है। वहीं बीजेपी ने 18 सीटों पर जीत दर्ज की है और 3 पर आगे चल रही है। एनपीएफ ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की है और 1 सीट पर आगे चल रही है।

Related Top posts:-  सावधान: मोबाइल 100% चार्ज करने के होते हैं ये नुकसान

उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल के.के पॉल ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। गोवा के सीएम लक्ष्मीकांत पारसेकर मैन्ड्रिम सीट से चुनाव हार गए हैं। पंजाब में कांग्रेस को बहुमत मिल गया है। वहीं मणिपुर की थाउबल सीट से इरोम शर्मिला चुनाव हार गई हैं। सीएम ओकराम इबोबी की जीत गए हैं। 2017 का ये विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों और उनके नेतृत्व का लिटमस टेस्ट था। एक बात तो है कि इन चुनावों के नतीजों से अब पीएम मोदी की केन्द्र, बीजेपी और दक्षिण एशिया में एक बेहद मज़बूत और प्रभावशाली शख़्स बनकर उभरेंगे। जिनके फैसलों का असर ना सिर्फ भारत की दशा-दिशा तय करेगा, बल्कि वर्ल्ड पॉलिटिक्स में भारतीय उप महाद्वीप की भूमिका को भी स्पष्ट कर देगा। इसके अलावा इस चुनाव के नतीजे 2019 के आम चुनाव की पृष्ठभूमि भी तैयार कर सकते हैं।

EVM में गड़बड़ी : मायावती ने पूछा, मुस्लिम इलाकों के वोट BJP को कैसे

नई दिल्ली/लखनऊ. यूपी समेत पांच राज्यों में जारी मतगणना को लेकर मायावती ने गंभीर आरोप लगाए हैं। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान माया ने कहा कि ईवीएम् मशीनों से छेड़छाड़ की गई। उन्होंने पूछा, अगर ऐसा नहीं है तो आखिर मुस्लिम इलाकों में भाजपा को कैसे वोट मिले?

बता दें कि मतगणना के बीच आ रहे रुझानों में 403 विधानसभा सीटों में यूपी में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलता दिखा रहा है। भाजपा 290 से ज्यादा सीटें जीतती नजर आ रही है। जबकि सपा गठबंधन दूसरे और करीब 20 सीटों के साथ मायावती की बसपा तीसरे नंबर पर है।

मोदी की आंधी में सभी दलबदलू बन गए विधायक

हरिओम द्विवेदी
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मोदी की आंधी में लगभग सभी दलबदलुओं की नैया पार हो गई है। बसपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य हों या कांग्रेस से आईं रीता बहुगुणा जोशी या बृजेश पाठक ने सभी ने भारी अंतर से जीत दर्ज की है। बता दें कि चुनाव से पहले सपा-बसपा और कांग्रेस पार्टियों से भाजपा में दर्जनों नेता शामिल हुए थे। आइए हम आपको कुछ प्रमुख नेताओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की है। वहीं दूसरे दलों के दलबदलू चुनाव हार गए हैं। चाहे वह नारद राय हों या अंबिका चौधरी।


रीता बहुगुणा जोशी
यूपी चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं कांग्रेस विधायक रीता बहुगुणा जोशी लखनऊ की कैंट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत गईं। उन्होंने मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को हराकर चुनाव जीता।
यह भी पढ़ें : 
ब्रजेश पाठक
बसपा से भाजपा में शामिल हुए पूर्व सांसद बृजेश पाठक ने लखनऊ मध्य में भाजपा की जीत का परचम लहराया है। कड़े मुकाबले में उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा को शिकस्त दी।
स्वामी प्रसाद मौर्य
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके केशव प्रसाद मौर्य भी चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी ने उन्हें पडरौना से प्रत्याशी बनाया, जहां से उन्होंने बसपा के ही जावेद इकबाल को करारी शिकस्त दी।
यह भी पढ़ें : 
रामपाल वर्मा
छह बार विधायक रहे रामपाल वर्मा ने इस बार चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम लिया। पार्टी ने उन्हें संडीला से विधानसभा प्रत्याशी बनाया, जहां उन्होंने कड़े मुकाबले में सपा के निकटतम प्रतिद्वंदी अब्दुल मन्नान को हराया।
श्याम प्रकाश
समाजवादी पार्टी के विधायक रहे श्माम प्रकाश चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें गोपामऊ से पार्टी का टिकट दिया। श्याम प्रकाश ने समाजवादी पार्टी की राजेश्वरी को कड़ी शिकस्त दी।
यह भी पढ़ें : 

रजनी तिवारी
सवायजपुर से बसपा विधायक रहीं रजनी तिवारी चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा ने उन्हें हरदोई जिले की शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया, जहां उन्होंने बसपा प्रत्याशी आसिफ खान को करारी शिकस्त दी।
महेश त्रिवेदी
बसपा के मंत्री रहे महेश त्रिवेदी ने भाजपा के टिकट पर कानपुर की किदवईनगर विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। उन्होंने कांग्रेस के अजय कपूर को करारी मात दी है।
यह भी पढ़ें : 
अशोक चंदेल
सपा के पूर्व सांसद अशोक चंदेल ने हमीरपुर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के डॉ. मनोज कुमार प्रजापति को करारी शिकस्त दी।
कुलदीप सेंगर
पूर्व सपा विधायक कुलदीप सेंगर ने चुनाव से ऐन पहले भाजपा की सदस्यता ले ली। भाजपा ने बांगरमऊ से चुनाव मैदान में उतारा। सेंगर ने समाजवादी पार्टी के बालूद खान को करारी शिकस्त दी।

 

यूपी : बीजेपी ने तोड़े सारे रिकार्ड, वो सीटें भी जीतीं जहां हमेशा मिली थी हार

नई दिल्ली/लखनऊ : उत्तर प्रदेश में रूझान लगभग साफ हो चुके हैं. बीजेपी ने बहुत ही मजबूत प्रदर्शन करते हुए यूपी में सीटों का अंबार लगा दिया है. सारे रिकार्ड तोड़ते हुए बीजेपी 302 सीटों पर आगे चल रही है. इसके साथ ही 30 से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां बीजेपी ने पहली बार जीत दर्ज की है. यूपी में कुल 67 ऐसी सीटें हैं जहां कभी बीजेपी जीतकर आगे ही नहीं आई है. गौरतलब है कि यूपी में सभी सीटों के रूझान आ गए हैं. 403 में से करीब 306 सीटों पर बीजेपी आगे चल रही है.

यह पहली बार है जब यूपी की राजनीति में किसी भी पार्टी ने 300 का आंकड़ा पार किया हो. जानकार इसे पीएम मोदी की लहर बता रहे हैं.  उनका कहना है कि मोदी को सभी वर्ग के लोगों ने वोट दिया है. आश्चर्य की बात यह है कि यूपी में कुल 67 ऐसी सीटें हैं जहां बीजेपी ने कभी जीत दर्ज नहीं की थी. लेकिन, उनमें से 33 सीटों पर बीजेपी ने इस बार हार का सिलसिला तोड़ दिया है. गौरतलब है कि इनमें से कई सीटें ऐसी हैं जहां एससी/एसटी और मुस्लिम बहुल इलाका है.

 

अकाली दल की हार के 5 बड़े कारण

जालंधरः पंजाब की सत्ता पर 25 साल तक काबिज रहने का दावा करने वाले निवर्तमान सुखबीर बादल को राज्य की जनता ने 10 साल के राजपाट के बाद ही विदा कर दिया। अकाली दल विरोधी दल की भूमिका हासिल करने में भी कामयाब नहीं हो पाया। अकाली -भाजपा गठबंधन की हार के कई कारण हैं लेकिन हम आपको 5 कारण बताने जा रहे हैं जिस कारण अकाली दल को राज्य की जनता ने नकार दिया।

पहला कारण
पंजाब में नशे  का मुद्दा अकाली दल के गले की हड्डी बन गया हालांकि 2012 के चुनावों के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया था लेकिन उस समय पर हालात इतने खराब नहीं थे। लेकिन पिछली सरकार के रहते विरोधी दल ख़ास तौर पर आम आदमी पार्टी (आप) ने इसको बड़ा मुद्दा बनाया और नौजवानों का एक बड़ा वर्ग अकाली-भाजपा गठबंधन से दूर हो गया।

दूसरा कारण
पंजाब में पिछली सरकार के दौरान कई बार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले सामने आए लेकिन इन मामलों पर गंभीर कार्रवार्इ न होने के चलते अकाली दल के परम्परागत मतदाताओं में गुस्सा था लिहाजा पंथक वोट टूट कर आपा की तरफ चला गया और इसका नुक्सान अकाली -भाजपा गठबंधन को भुगतना पड़ा। बरगाड़ी में 2 नौजवानों पर पुलिस की तरफ से चलाई गई गोली के कारण भी लोगों में भारी गुस्सा था।

Related Top posts:-  Memory card मोबाइल में हैं, तो जान लें जरूरी बातें। नहीं तो होगा सकता है मोबाइल ख़राब

तीसरा कारण
पिछले 10 साल की सत्ता विरोधी लहर का भी अकाली दल को भारी नुक्सान हुआ है। इस अवधि में रहते कई बार अकाली दल पर रेत माफिया, केबल माफिया और शराब माफिया को शह देने के दोष लगे परन्तु इन मामलों को गंभीरता से नहीं लिया गया मतदान के दौरान अब जनता ने अकाली दल के खिलाफ रोष व्यवक्त करते हुए फतवा दिया।

चौथा कारण
2007 और 2012 के चुनावों के दौरान अकाली दल को सत्ता में लाने में व्यापारी वर्ग और उद्योग जगत से जुड़े लोगों की बड़ी हिस्सेदारी थी लेकिन 2012 से लेकर 2017 के दौरान व्यापारी वर्ग को नजर अंदाज किया गया। ये दोनों वर्ग  करोड़ों रुपए के रिफंड के लिए इंतजार करते रहे लेकिन इनकी तरफ कोर्इ ध्यान नहीं दिया गया लिहाज़ा व्यापारी वर्ग कांग्रेस की तरफ चला गया और शहरों में कांग्रेस को बंपर जीत हासिल हुर्इ।

 पांचवां कारण
अकाली दल की हार का 5वां बड़ा कारण भारतीय जनता पार्टी का पंजाब के चुनावों में रुचि न दिखाना रहा। भाजपा की सीनियर लीडरशिप उत्तर प्रदेश के चुनाव को गंभीरता के साथ लड़ती रही लेकिन पंजाब में पार्टी के उम्मीदवारों के चयन से लेकर प्रचार में भी कोर्इ गंभीरता नहीं दिखाई। यहां तक कि आर.एस.एस. का कैडर भी मतदान सक्रिय नजर  नज़र नहीं आया।

 

कब्रिस्तान-श्मशान कॉन्ट्रोवर्सी के बाद यूपी में पोलराइजेशन, BJP को 5 गुना ज्यादा सीटें

लखनऊ. जिस यूपी में 70 साल के दौरान किसी भी पार्टी को 300 की सीटें नहीं मिलीं, वहां BJP इस रिकॉर्ड फिगर तक पहुंचती नजर आ रही है। इसकी वजह आखिरी 4 फेज की वोटिंग में बीजेपी को मिली बढ़त है। इन चारों फेजों से पहले मोदी ने कब्रिस्तान और श्मशान वाला बयान दिया, जिस पर कॉन्ट्रोवर्सी हुई। माना जा रहा है, यहीं से पोलराइजेशन शुरू हुआ। इसके बाद रुझान चौंकाने वाले हैं। चारों फेज की 194 सीटों में से बीजेपी 105 सीटों पर आगे है। पिछली बार यहां बीजेपी को 21 सीटें मिलीं थीं, यानी इस बार उसे 5 गुना ज्यादा सीटें मिलीं हैं। यूपी का टर्निंग प्वाइंट…


– 19 फरवरी को मोदी ने सपा सरकार को घेरते हुए यूपी के फतेहपुर की रैली में कहा था, ”गांव में अगर कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए, अगर रमजान में बिजली रहती है तो दिवाली में भी बिजली आनी चाहिए।” यहीं से पोलराइजेशन शुरू हो गया।

23 फरवरी के बाद हुई चार फेज की वोटिंग
इसके बाद 23 फरवरी को चौथे फेज की वोटिंग हुई। इसी दिन महाराष्ट्र के शहरी निकायों के चुनाव नतीजे आए। इनमें बीजेपी बीएमसी में पहली बार शिवसेना की बराबरी पर आई। बाकी 8 शहरों में भी वह नंबर वन बनी।

चौथे फेज में पांच गुना ज्यादा सीटें

फेज

सीटें

2017 में सीटें

2012 में सीटें

4Th फेज

53

27

5

पांचवें फेज में सात गुना ज्यादा सीटें

फेज

सीटें

2017 में सीटें

2012 में सीटें

5Th फेज

52

35

5

छठवें फेज में ढाई गुना ज्यादा सीटें

फेज

सीटें

2017 में सीटें

2012 में सीटें

6Th फेज

49

18

7

सातवें फेज में छह गुना ज्यादा सीटें

फेज

सीटें

2017 में सीटें

2012 में सीटें

7Th फेज

40

25

4

पिछले चुनाव में 10%, इस चुनाव में 54% से ज्यादा सीटें

टोटल सीट

2017 में सीटें

2012 में सीटें

194

105

21

माना जा रहा है कि मोदी के बयान के बाद चार फेज की वोटिंग के दौरान पोलराइजेशन हुआ। (फाइल)

 

ElectionResults: दोनों सीटों से हारे सीएम हरीश रावत, देंगे इस्तीफा

देहरादूनः उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर अब तक आए परिणामों में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस की ओर से पूरे चुनावी अभियान का नेतृत्व करने वाले और राज्य के  मौजूदा मुख्यमंत्री हरीश रावत हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा विधानसभा सीट से चुनाव हार चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की हार एक तरह से स्वीकार कर चुके हरीश रावत दोनों सीटों से मिली हार के बाद देर शाम तक मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस ने हरीश रावत के चेहरे को सामने रखकर चुनाव लड़ा लेकिन हरीश रावत को हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा दोनों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा।

हरीश रावत ने इस बार पहाड़ से चुनाव लड़ने की बजाय तराई की दो सीटों से चुनाव लड़ा था, लेकिन पहाड़ खुद छोड़ने वाले हरीश रावत को तराई ने भी नकार दिया है। हरिद्वार ग्रामीण सीट से भाजपा नेता स्वामी यतीश्वरानंद ने कांग्रेस के सबसे बड़े नेता और मुख्यमंत्री हरीश रावत को जबरदस्त पटखनी दी है। उन्होंने हरीश रावत को 12 हजार से भी ज्यादा मतों से पराजित किया। किच्छा में भी उन्हें भाजपा नेता राजेश शुक्ला ने हरा दिया।

रावत की राजनीतिक सफर
विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद फरवरी, 2014 में हरीश रावत उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री बने थे। जुलाई, 2014 में उन्होंने धारचूला विधानसभा उपचुनाव 19000 वोटों से जीता था। उत्तर प्रदेश को 2 राज्‍यों में बांटकर जब उत्तराखंड बना गया, उस समय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रुप में हरीश रावत सामने आए। सन 1980 में वह पहली बार अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। इसके बाद 1984 व 1989 में भी उन्होंने संसद में इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। पिछले चुनावों में हरीश रावत ने हरिद्वार संसदीय सीट सें चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इसके बाद हरिद्वार सीट जीतकर वर्चस्‍प स्‍थापित करने वाले हरीश रावत को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री और कैबिनेट मंत्री का दायित्व सौंपा था।

गौरतलब है कि 15 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई थी। इस बार प्रदेश में कुल 68 फीसदी मतदान हुआ. पूरे राज्य में सबसे ज्यादा वोट उत्तरकाशी में पड़े, यहां कुल वोटर्स में से 73 फीसदी ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इसके बाद 70 प्रतिशत मतदान के साथ उधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल दूसरे नंबर पर रहे।

 

UP चुनाव के बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद और भाजपा नेता आपस में ट्विटर भिड़े

पटना.यूपी चुनाव परिणाम को लेकर ट्विटर लालू और सुशील मोदी आपस में भिड़ गए हैं। बिहार भाजपा के सीनियर नेता सुशील मोदी ने लालू से ट्विटर पर पूछा कि क्या हाल बा? लालू यादव ने भी इसपर पलटवार करते हुए कहा कि ठीक बा। देखा ना, बीजेपी ने तुम्हें यूपी में नहीं घुसने दिया तो उसे कितना फायदा हुआ। चुनाव परिणाम पर अभी तक लालू के नहीं मिले हैं प्रतिक्रिया…

लालू के इस ट्विट को लगभग एक हजार लोगों ने रीट्विट किया है। साथ ही लगातार लोग इस पर प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। दरअसल, यूपी चुनाव के दौरान लालू ने भी खूब प्रचार किया था। बतातें चलें कि लालू यूपी में सपा-कांग्रेस की जीत का दावा कर रहे थे। लेकिन, नतीजे आने के बाद लालू यादव की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवाऔर मणिपुर के विधानसभा चुनावों के वोटों की काउंटिंग जारी है। रुझानों में यूपी में बीजेपी को तीन चौथाई बहुमत मिल चुका है। यूपी में बीजेपी की 15 साल बाद सत्ता में वापसी होने जा रही है। वहीं, उत्तराखंड के रुझानों में भी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। पंजाब के रुझानों में कांग्रेस को बहुमत मिल चुका है। मणिपुर के रुझानों में बीजेपी को बढ़त है। गोवा में कांग्रेस आगे चल रही है। मायावती ने कहा, “चुनाव में बीएसपी को जनता ने नहीं, ईवीएम ने हराया। चुनाव रद्द होना चाहिए।”

 

32 साल में यूपी में बीजेपी की सबसे बड़ी जीत…

– बीजेपी यूपी में 1985 से चुनाव लड़ रही है। पहले चुनाव में उसने यूपी में 16 सीटें जीती थीं।

Related Top posts:-  हाफिज के बेटे ने कबूला दाऊद का आतंकी कनेक्शन, PM मोदी को दी धमकी, खतरे में है जान। 

– 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 1991 का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस बार उसे 300 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं।

– राम मंदिर मुद्दे पर बीजेपी को 1991 में 221 सीटें मिलीं और कल्याण सिंह की अगुआई में बीजेपी सरकार बनी।

– वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में वह 328 विधानसभा सीटों पर आगे थी। इस लहर को बीजेपी ने कायम रखा है।

– बता दें कि शनिवार शाम 4.30 बजे नरेंद्र मोदी और अमित शाह दिल्ली के बीजेपी ऑफिस में संबोधित करेंगे।

किसके कितनी आगे बीजेपी?

– बीजेपी फिलहाल 182 सीटों पर आगे चल रही है। 135 सीटों पर उसकी जीत हो चुकी है। इस लिहाज से वह सपा-कांग्रेस गठबंधन (55 सीटें) से 5.5 गुना से ज्यादा और बीएसपी (22 सीटें) से 14 गुना की बढ़त पर है।

यहां भी बन रही है बीजेपी की सरकार

– रुझानों में उत्तराखंड में भी बीजेपी को बहुमत मिल चुका है। यहां भी बीजेपी सरकार बना सकती है।

इन नतीजों ने चौंकाया

– गोवा के सीएम लक्ष्मीकांत पार्सेकर और उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत चुनाव हार गए।

चुनाव के अपडेट्स

यूपी के रुझान:

– यूपी के रुझानों में बीजेपी 297 सीटों पर आगे चल रही है। 11 पर उसकी जीत हो चुकी है। यानी उसे तीन चौथाई बहुमत (302) से ज्यादा मिल चुका है। सपा-कांग्रेस गठबंधन 65 और बीएसपी 22 सीटों पर आगे चल रहे हैं। अन्य 8 सीट पर आगे है।

– अब तक यूपी में बीजेपी को 42% वोट मिल चुके है। लोकसभा चुनाव (2014) में बीजेपी को 42% वोट मिले थे।

– बता दें कि यूपी में 100 सीटें मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं। इसमें बीजेपी 40 से ज्यादा सीटों पर आगे है।

– यूपी में दलित बहुल 100 सीटों में बीजेपी 60 से ज्यादा सीटों पर आगे है।

– यूपी के पहले नतीजे में बीजेपी को मुस्लिम बहुल देवबंद सीट पर जीत मिली। कुंवर बृजेश सिंह ने बीएसपी के माजिद अली को हराया।

– मायावती ने कहा, “ईवीएम में गड़बड़ी करके बहुमत हासिल किया है। मैं नरेंद्र मोदी और अमित शाह को चुनौती देती हूं कि वे चुनाव आयोग को इस बारे में बताएं। मैं चाहती हूं कि पुरानी व्यवस्था यानी बैलट पेपर से चुनाव कराए जाएं।”

– “बीजेपी ने कोई मुस्लिम कैंडिडेट खड़ा नहीं किया। इसके बावजूद उन्हें मुस्लिम इलाकों के पूरे वोट मिले। ये बात गले नहीं उतर रही। मुस्लिम समाज के लोग कह रहे हैं कि जब हमने बीजेपी को वोट ही नहीं दिया, तो उन्हें वोट कैसे पड़े।”

पंजाब में:

– रुझानों में कांग्रेस को बहुमत मिल चुका है।

गोवा में:

– यहां मिल रहे रुझानों में कांग्रेस को बढ़त है।

मणिपुर में:

– बीजेपी ने कांग्रेस से बढ़त बना ली है।

केजरीवाल के घर जश्न की तैयारी फीकी पड़ी, सपा के दावे पीछे रह गए

– दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के घर तैयारी की गई थी। रिजल्ट देखने के लिए बड़ी स्क्रीन लगाई गई। साथ ही आसपास की जगह को बैलून से सजाया गया था।

– सपा प्रवक्ता ने राजेंद्र चौधरी ने कहा था कि सपा-कांग्रेस अलायंस यूपी में इलेक्शन जीत रहा है।

– यूपी बीजेपी के प्रदेश प्रेसिडेंट केशव मौर्या ने कहा कि बीजेपी दो तिहाई मतो से जीत दर्ज कर रही है।

– सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि गठबंधन से हमे नुकसान हुआ है। अगर अकेले भी लड़ते तो भी हम ज्यादा सीट जीतते।

– बीजेपी नेता योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीजेपी बहुमत से सरकार बनाएगी।

स्टूडियो से देखें 5 राज्यों के चुनाव नतीजों पर Liveडिबेट DainikBhaskar.com पर

– आप DainikBhaskar. com के स्टूडियो से 5 राज्यों के चुनाव नतीजों पर लाइव डिबेट देख सकेंगे।

– नतीजों के सटीक एनालिसिस के साथ ही हर राज्य के लिए उनकी खासियत और बदलते समीकरणों पर एक्सपर्ट व्यू मिलेगा।

– यूपी पंजाब की अलग-अलग लोकेशंस से लाइव अपडेट्स मिलेंगे। इन्टरैक्टिव ग्राफिक्स के जरिए पल-पल बदलती स्थितियों से भी अपडेट रह सकेंगे।

2012और2014में क्या थे नतीजे,क्यों हैं नजरें

1) यूपी: 403 सीटें, बहुमत 202 पर

2012, 2014 के नतीजे और वोट शेयर

– यहां विधानसभा की 403 और लोकसभा की 80 सीटें हैं।

पार्टी 2012 विधानसभा वोट % 2014 लोकसभा
एसपी 224 29.2 5
बीएसपी 80 25.9
बीजेपी 47 15 73
कांग्रेस 28 11.6 2
अन्य 24 18.3

क्यों हैं नजरें?

– 15 साल से बीजेपी यहां सरकार में नहीं आ पाई है। 2000 से 2002 तक राजनाथ सिंह यहां पर सीएम थे।

– 14 साल से बीएसपी सरकार से बाहर है। इसके बाद से मुलायम सिंह यादव और फिर 2012 में अखिलेश सीएम बने।
– 28साल बाद यहां कांग्रेस को यूपी में सत्ता में वापसी की उम्मीद है। पिछली बार 1989 में एनडी तिवारी कांग्रेस से सीएम थे।

– राष्ट्रपति चुनाव के लिए यूपी अहम है। यूपी समेत 3 राज्यों में बीजेपी की सरकार बनती है तो प्रेसिडेंशियल इलेक्शन के लिए उसकी राह आसान हो जाएगी।

2) पंजाब: 117 सीटें, 59 पर बहुमत

2012, 2014 के नतीजे और वोट शेयर

– यहां विधानसभा की 117 और लोकसभा की 13 सीटें हैं।

पार्टी 2012 विधानसभा वोट % 2014 लोकसभा
अकाली 56 34.7 4
आप 4
बीजेपी 12 7.2 2
कांग्रेस 46 40.1 3
अन्य 3 18

क्यों हैं नजरें?

70 साल बाद पंजाब में त्रिकोणीय मुकाबला है। 1947 से यहां अकाली और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता आया है। आप ने इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया।

– 90 साल के हो चुके प्रकाश सिंह बादल का शायद ये आखिरी चुनाव हो। खास बात ये कि एग्जिट पोल के हिसाब से बादल हैट्रिक लगाते नहीं दिखे थे।

– 74 साल के कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही एलान कर चुके हैं कि ये उनका आखिरी चुनाव है। लेकिन, एग्जिट पोल खरा उतरा तो जाते-जाते जीत का सेहरा उनके सिर बंध जाएगा।

3) गोवा: 40 सीटें, 21 पर बहुमत

2012, 2014 के नतीजे और वोट शेयर

– यहां विधानसभा की 40 और लोकसभा 2 की सीटें हैं।

पार्टी 2012 विधानसभा वोट % 2014 लोकसभा
बीजेपी 21 34.7 2
कांग्रेस 9 30.8
एमएजी 3 6.7
जीवीपी 2 3.5
अन्य 5 16.7

क्यों हैं नजरें?

– सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाले डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पर्रिकर यहां के सीएम रह चुके हैं। चुनावी कैम्पेन से ही ये चर्चा है कि बीजेपी जीती तो सीएम का चेहरा वही होंगे।

– सुभाष वेलिंगकर कभी गोवा में आरएसएस का चेहरा हुआ करते थे। लेकिन, इस बार चुनावों में उन्होंने अलग पार्टी बनाई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वो बीजेपी का खेल बिगाड़ सकते हैं।

4) उत्तराखंड- 70 सीटें, 36 पर बहुमत

2012, 2014 के नतीजे और वोट शेयर

– यहां विधानसभा की 70 और लोकसभा की 5 सीटें हैं।

पार्टी 2012 विधानसभा वोट % 2014 लोकसभा
कांग्रेस 32 33.8
बीजेपी 31 31.1 5
बीएसपी 3 12.2
यूकेडीपी 1 1.9
अन्य 3 12.3

क्यों हैं नजरें?

– कांग्रेस के 9 बागी विधायकों में से 7 ने बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ा है। कांग्रेस-बीजेपी की जीत-हार के लिए इनकी परफॉर्मेंस मायने रखती है।

– बीजेपी कांग्रेस की फूट का फायदा उठा पाती है या नहीं? दल-बदल से कांग्रेस के कमजोर होने के मैसेज का पब्लिक पर क्या असर पड़ता है?

5) मणिपुर- 60 सीटें, 31 पर बहुमत

2012, 2014 के नतीजे और वोट शेयर

– यहां विधानसभा की 60 और लोकसभा 2 की सीटें हैं।

पार्टी 2012 विधानसभा वोट % 2014 लोकसभा
कांग्रेस 42 42.4 2
एआईटीसी 7 17
एमएससीपी 5 8.4
एलजेपी 1 0.6
अन्य 1 24.1

क्यों हैं नजरें?

– 15 साल से कांग्रेस की सरकार है। लेकिन, एग्जिट पोल में दो सर्वे में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है।

– 31 लाख पॉपुलेशन में से करीब 63% मेतई कम्युनिटी का दबदबा है और इसका कांग्रेस को समर्थन हासिल है। देखना होगा ये सपोर्ट इस बार कितना काम करता है।

(Visited 1 times, 1 visits today)

Have a Query? Ask Here, we will get back to you!